हमारी आँखों को हर रोज़ कुछ खास तत्वों की ज़रूरत होती है जो उन्हें अंदर से मज़बूत रखते हैं। अच्छी बात यह है कि ये तत्व रोज़ के खाने में आसानी से मिल जाते हैं।
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ज़्यादातर लोग तब आँखों की परवाह करते हैं जब कुछ गड़बड़ हो जाता है। लेकिन रेटिना की कोशिकाएँ रोज़ टूटती हैं और रोज़ ही उन्हें नए पोषण की ज़रूरत होती है।
पालक, अंडे, गाजर, मछली, आँवला — इनमें से कुछ न कुछ रोज़ खाने में शामिल करना काफी है। यह कोई जटिल डाइट नहीं, बस एक आदत है।
हर मौसम में आँखों के लिए सही खाद्य पदार्थ अलग-अलग होते हैं
इन्हें अलग-अलग नहीं, मिलाकर खाएँ
पालक, मेथी और हरे मटर में मिलता है। रेटिना को नीली रोशनी से बचाता है और आँखों की थकान कम करता है।
गाजर, शकरकंद और कद्दू इसके मुख्य स्रोत हैं। शरीर इसे विटामिन A में बदलता है जो रात की दृष्टि के लिए ज़रूरी है।
रेटिना की संरचना और आँखों की नमी के लिए अनिवार्य। मछली न खाने वाले अखरोट और अलसी से पा सकते हैं।
आँखों की रक्त वाहिकाओं को मज़बूत करता है। आँवला भारत का सबसे किफायती स्रोत है — और यह बहुत असरदार भी है।
आँखों की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाता है। बादाम, सूरजमुखी के बीज और मूंगफली इसके आसान स्रोत हैं।
विटामिन A को रेटिना तक पहुँचाता है और मेलेनिन बनाता है — आँखों की प्राकृतिक सुरक्षा। तिल, काजू और दालों में भरपूर।
40 की उम्र पार करने के बाद रेटिना में ल्यूटिन का स्तर कम होने लगता है। यही वजह है कि इस उम्र में हरी सब्ज़ियाँ और रंगीन फल और भी ज़रूरी हो जाते हैं।
अच्छी खबर यह है कि यह प्रक्रिया धीमी की जा सकती है। नियमित और सही खान-पान से आँखें लंबे समय तक अच्छी तरह काम कर सकती हैं।
खाने के साथ-साथ पानी पीना भी आँखों की नमी बनाए रखने के लिए ज़रूरी है। जब शरीर में पानी कम होता है तो आँखें जल्दी थकती हैं और सूखी लगती हैं। दिन में 8-10 गिलास पानी — यह एक आसान लेकिन बड़ा कदम है।
स्क्रीन के सामने काम करने वाले लोगों के लिए ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन खास तौर पर फायदेमंद हैं। ये रेटिना में जमा होकर लगातार सुरक्षा देते हैं — लेकिन इसके लिए इन्हें नियमित रूप से खाना ज़रूरी है, कभी-कभी नहीं।
साल में एक बार आँखों की जाँच करवाना एक ऐसी आदत है जो बड़ी समस्याओं को छोटे से ही पकड़ लेती है। सही पोषण और नियमित जाँच — दोनों मिलकर आँखों की सेहत का असली राज़ हैं।
"सर्दियों में पालक और सरसों का साग खूब खाता था लेकिन नहीं पता था कि इसका फ़ायदा आँखों को भी होता है। यहाँ पढ़कर अब जानबूझकर इन्हें खाता हूँ।"
— रमेश अय्यर, हैदराबाद
"मेरी उम्र 55 है और डॉक्टर ने बताया था कि आँखों में बदलाव आ रहे हैं। मैंने गाजर, आँवला और बादाम रोज़ लेना शुरू किया। अगली जाँच में डॉक्टर खुश थे।"
— सरला देवी, जोधपुर
"मैं दिन में 12 घंटे कोडिंग करता हूँ। आँखें हमेशा थकी रहती थीं। अलसी और अखरोट डाइट में जोड़े — दो महीने में थकान काफी कम हुई।"
— करण मेहता, पुणे
"मौसमी खाने का चार्ट देखकर समझा कि हर मौसम में अलग-अलग चीज़ें आँखों के लिए होती हैं। अब हम घर में सीज़न के हिसाब से खाना बनाते हैं।"
— प्रभा राव, विशाखापट्टनम
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हाँ। मौसमी खाद्य पदार्थ ताज़े होते हैं और उनमें पोषण की मात्रा ज़्यादा होती है। इसके अलावा, हर मौसम में अलग-अलग विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं — जो मिलकर एक पूरा पोषण देते हैं।
हाँ, ल्यूटिन गर्मी से ज़्यादा प्रभावित नहीं होता। बल्कि थोड़े तेल या घी में पकाने से यह बेहतर तरीके से अवशोषित होता है। तो सब्ज़ी बनाकर खाना भी उतना ही असरदार है।
पोषण आँखों की सेहत बनाए रखता है, लेकिन यह पहले से मौजूद चश्मे के नंबर को ठीक नहीं करता। इसका असर लंबे समय में होता है — आँखें ज़्यादा धीरे कमज़ोर होती हैं।
आँवला विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है। रोज़ एक ताज़ा आँवला, या हफ्ते में 4-5 बार — दोनों ठीक है। सर्दियों में ताज़ा और बाकी मौसम में मुरब्बा या चूर्ण भी काम करता है।
नहीं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखें। रोज़ 5-6 अखरोट काफी हैं। इससे ओमेगा-3 और विटामिन E दोनों मिलते हैं। ज़्यादा मात्रा में कैलोरी बढ़ सकती है, इसलिए संतुलन ज़रूरी है।